रविवार, मार्च 27

देखिए आते हैं अब कबतक निकल के देवता.

आदमी क्या, रह नहीं पाए सम्हल के देवता
रूपसी के जाल में उलझे फिसल के देवता

बाढ़ की लाते तबाही तो कभी सूखा विकट
किसलिए नाराज़ रहते हैं ये जल के देवता

भीड़ भक्तों की खड़ी है देर से दरबार में
देखिए आते हैं अब कब तक निकल के देवता

की चढ़ावे में कमी तो दण्ड पाओगे ज़रूर
माफ़ करते ही नहीं हैं आजकल के देवता

लोग उनके पाँव छूते हैं सुना है आज भी
वो बने थे ‘सीरियल’ में चार पल के देवता

भीड़ इतनी थी कि दर्शन पास से सम्भव न था
दूर से ही देख आए हम उछल के देवता

कामना पूरी न हो तो सब्र खो देते हैं लोग
देखते हैं दूसरे ही दिन बदल के देवता

है अगर विश्वास तो फिर डर कहीं लगता नहीं
हर क़दम पर हैं हमारे साथ बल के देवता

है अगर किरदार में कुछ बात तो फिर आएंगे
कल तुम्हारे पास अपने आप चल के देवता

शाइरी सँवरेगी अपनी हम पढ़ें उनको अगर
हैं पड़े इतिहास में कितने ग़ज़ल के देवता

11 टिप्‍पणियां:

  1. भीड़ इतनी थी कि दर्शन पास से सम्भव न था
    दूर से ही देख आए हम उछल के देवता

    कामना पूरी न हो तो सब्र खो देते हैं लोग
    देखते हैं दूसरे ही दिन बदल के देवता.....


    बहुत सुन्दर शेर....
    बेहतरीन ग़ज़ल...
    हर शे‘र में आपका निराला अंदाज झलक रहा है।

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  2. वर्षा जी,
    ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत आभार........यती

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  3. है अगर किरदार में कुछ बात तो फिर आएंगे
    कल तुम्हारे पास अपने आप चल के देवता
    वाह. बहुत सुन्दर. बधाई स्वीकारें

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  4. आदरणीय ओमप्रकाश यती जी
    सादर अभिवादन !

    क्या बात है ! हर शे'र दिल में उतरने वाला …
    शाइरी संवरेगी अपनी हम पढ़ें उनको अगर
    हैं पड़े इतिहास में कितने ग़ज़ल के देवता

    हम जिन रास्तों के मुसाफ़िर हैं , उन रास्तों पर अपने क़दमों के निशान छोड़ जाने वालों के प्रति इतनी ईमानदारी से ऐसी श्रद्धा दर्शाने वाला शे'र शायद ही किसी शाइर ने कहा हो आपसे पहले … साधुवाद !

    आपके ब्लॉग की हर ग़ज़ल पसंद आई …
    एक अच्छे रचनाकार के ब्लॉग पर आया हूं , इस बात की संतुष्टि और प्रसन्नता है । बार बार आना चाहूंगा…

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  5. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  6. आपको भी सपरिवार नवरात्र की बहुत-बहुत शुभकामनाएं .....

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  7. bahut hi maanikhez aur umda ghazal...waaaah...aur khaaskar ye ash'aar -
    कामना पूरी न हो तो सब्र खो देते हैं लोग
    देखते हैं दूसरे ही दिन बदल के देवता

    है अगर किरदार में कुछ बात तो फिर आएंगे
    कल तुम्हारे पास अपने आप चल के देवता

    शाइरी सँवरेगी अपनी हम पढ़ें उनको अगर
    हैं पड़े इतिहास में कितने ग़ज़ल के देवता

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  8. sirji isi ghazal ke sher kahin parhe thay aur dhoondhte hue kavitakosh ke zariye aapke naam se parichaye hua :)

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  9. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई संदीप जी...

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